विदित हो अभी दो राज्यों Haryana और Jammu & Kashmir के चुनाव होने जा रहे है, हरियाणा में भाजपा पिछले दस सालों से सत्ता पर काबिज है और इस बार जनता के भारी असंतोष का सामना कर रही है. किसान आंदोलन, बेरोजगारी, और अग्निवीर का मुद्दा प्रमुखता से छाया हुआ है.
तमाम घटनाये सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ जा चुकी है, पिछले वक्त ही बमुश्किल जोड़ तोड़ करके सरकार बनी थी, अब तमाम सहयोगी भी बीजेपी से अपनी दूरी बना चुके है. सबसे बड़ी बात Haryana में किसान का ऐसा तीखा विरोध देखने को मिल रहा है, इसकी शायद कल्पना भी भाजपा ने नहीं की होगी?
अभी अभी कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक्स पर लिखते हुये कहा “कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने Haryana विधानसभा चुनाव में जिन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, उनमें 36 बिरदारी के गैर-राजनैतिक पृष्ठभूमि के युवा, योग्य, टिकाऊ और जिताऊ चेहरों को बड़ी संख्या में जगह मिली है.
वो आगे लिखते है “कांग्रेस प्रत्याशियों की पूरी सूची आने के बाद से प्रदेश में कांग्रेस के पक्ष में चल रही प्रचंड लहर, महा-प्रचंड लहर में तब्दील हो गई है” आपको बताते चले हरियाणा (Haryana) में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है और भाजपा के खिलाफ जमीन पर माहौल बनाने में कही न कही सफल रहा है.
कही न कही भाजपा बैकफुट पर है और ऐसे संकेत आ रहे की केजरीवाल को मिली जमानत में कही न कही भाजपा का ही हाथ है, सोशल मीडिया में खबर बहुत तेजी से वायरल है आखिर क्या कारण है कि कांग्रेस और आप के गठबंधन न हो पाने बाद केजरीवाल जी को अचानक से जमानत मिल गई अब वो हरियाणा में चुनाव प्रचार कर पाएंगे. हालाँकि इससे पहले भी लोकसभा चुनाव में उन्हें जमानत मिल गई थी.
टिकटों की घोषणा के बाद तमाम भाजपा नेताओ ने अपना पाला बदलकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया, आजकल ये एक सामान्य प्रक्रिया हो चली है अब विचारधारा केवल जनता के लिए रह गई है नेतागण अपनी सुविधानुसार दल बदलते रहते है, अब देखने वाली बात होगी हरियाणा (Haryana) में कांग्रेस कितना कमाल कर पाती है, या भाजपा फिर से तीसरी बार कोई चमत्कार कर जाती है?




























































