आपको बताते चले आज लोकतंत्र में जनता (Public) असली मालिक कही सिर्फ एक मजाक का विषय बनकर तो नहीं रह गई हैं? स्मृति ईरानी ने भरी संसद में जिस लहजे में अपनी बात रखी है वह कहीं से भी एक केंद्रीय मंत्री के पद पर बैठे हुए किसी व्यक्ति या महिला के लिए शोभा नहीं देता. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि स्मृति ईरानी ने सोनिया गांधी से भी अभद्रता की है और धक्का-मुक्की करने की कोशिश की है. हालांकि इन आरोपों को अगर किनारे रख दिया जाए तो भी जिस प्रकार का व्यवहार बोलते वक्त स्मृति ईरानी का संसद के अंदर दिखाई दिया वह कहीं से भी एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है.
अधीर रंजन चौधरी द्वारा कही गई बात को स्मृति ईरानी ने मुद्दा बनाया और उसी को लेकर सोनिया गांधी से भी उन्होंने बहस की. सोनिया गांधी की उम्र 75 पार कर चुकी है और उनसे इस तरीके से बात करना क्या स्मृति ईरानी के लिए ठीक था और वह जिस बात को मुद्दा बना रही हैं तो क्या वह खुद निष्पक्ष थी? अगर बात महिला सम्मान की ही हो रही है तो स्मृति ईरानी बाकी दूसरे मुद्दों पर खामोश क्यों थी? उनका कहना है कि अधीर रंजन चौधरी ने जो बोला है उसके लिए सोनिया गांधी माफी मांगे, पूरी कांग्रेस पार्टी माफी मांगे.
पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने एक रैली में, “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” की जगह, “बेटी बचाओ बेटी पटाओ” बोल दिया था तो क्या इसके लिए पूरी भाजपा को माफी मांगना पड़ा था प्रधानमंत्री मोदी ने माफी मांगी थी? स्मृति ईरानी प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कही गई इस बात पर कुछ बोली क्यों नहीं थी? क्या उस समय देश की बेटियों का अपमान नहीं हुआ था? क्या महिला का सम्मान राजनीतिक पार्टी और राजनीतिक विचारधारा देखकर करती हैं स्मृति ईरानी? निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के मुंह से भी गलती से यह वाक्य निकला था और अधीर रंजन चौधरी के मुंह से भी गलती से ही निकला है.
फिर अभी इतना हंगामा क्यों और ऊपर से अधीर रंजन चौधरी ने माफी भी मांग ली है. कहीं ऐसा तो नहीं कि स्मृति ईरानी खबरों में बने रहने के लिए और गोवा में उनकी बेटी द्वारा तथाकथित अवैध रूप से चलाए जा रहे “बार” वाले मुद्दे को दबाने के लिए इतना सब कुछ कर रही हैं और यह सब कुछ करते हुए उन्होंने एक 75 साल की उम्र पार कर चुकी महिला सांसद के साथ भी अभद्रता करने से पीछे नहीं हटी?
कई राजनीतिक जानकार और लंबे समय से सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन को कवर करने वाले लोग बताते हैं कि सोनिया गांधी ने कभी भी किसी से अभद्रता नहीं की है उन्होंने विपक्षी नेताओं और सांसदों तक से शालीनता से बात की है और अपनी बात को रखा है फिर जिस तरह से बीजेपी के नेता आरोप लगा रहे हैं कि सोनिया गांधी ने स्मृति ईरानी को धमकाने की कोशिश की क्या यह कहीं से भी गले उतरने वाली बात है? मुद्दा बनाने के लिए और किसी दूसरे मुद्दे को दबाने के लिए सोनिया गांधी के बारे में इतना बड़ा आरोप लगाना क्या उचित है?
स्मृति ईरानी के अगर राजनीतिक जीवन को देखा जाए तो 2014 के बाद से वह लगातार गांधी परिवार के खिलाफ हमले करती रही हैं. ज्यादातर बार उन्होंने गांधी परिवार पर ऐसे आरोप लगाए जो साबित नहीं कर पाई. लेकिन कभी भी गांधी परिवार के किसी सदस्य ने उनसे माफी मांगने के लिए नहीं कहा. क्या उनके द्वारा जो राजनीतिक आरोप लगाए गए हैं गांधी परिवार पर और कोर्ट में साबित नहीं हुए, उसके लिए जनता से और गांधी परिवार से माफी मांगी गई?
वोटों की फसल काटने के लिए बीजेपी के तमाम नेताओं ने और खुद स्मृति ईरानी ने कई तरह के राजनीतिक आरोप गांधी परिवार पर लगाए. लेकिन गांधी परिवार ने कभी भी इन पर कुछ नहीं बोला. स्मृति ईरानी जानबूझकर गांधी परिवार का नाम हर प्लेटफार्म पर लेती रही हैं, सिर्फ इसलिए कि शायद उन्हें गांधी परिवार का नाम लेने से मीडिया में तवज्जो मिलती है. जिस तरह का बर्ताव इस वक्त बीजेपी के तमाम नेता कर रहे हैं, अगर सरकार बदली और वही बर्ताव इनके साथ हुआ फिर किस तरह से बचाव करेंगे यह लोग अपना?
मोहन भागवत भी कई बार बोल चुके हैं कि शादी विवाह एक सौदा है. यानी देश के तमाम हिंदू जो धार्मिक रीति रिवाज से शादी के बंधन में बंधते हैं उनकी भावनाओं को मोहन भागवत में आहत किया था. तमाम महिलाएं जो शादी के बंधन में बंध कर अपने पति के साथ पूरा जीवन व्यतीत करती हैं, उनको अपने बयान के माध्यम से अपमानित किया था. उस वक्त महिला सम्मान की बात करते हुए मोहन भागवत का विरोध क्यों नहीं किया स्मृति ईरानी ने? महिला सम्मान की बात भी राजनीतिक विचारधारा देखकर इस स्मृति ईरानी कर रही है. यह तो देश की जनता के साथ भद्दा मजाक है.
Disclaimer: The above article are the personal views of the author.





























































