देखते देखते दिल्ली(Delhi) का चुनाव आ गया, अभी अभी संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सातों सीट भाजपा ने जीत ली कही कड़ा मुकाबला तो कही आसानी से जीत गए, लेकिन इसके उलट विधानसभा के भाजपा के सामने बहुत ज्यादा कड़ी चुनौती है, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों भाजपा के लिए बड़ी मुश्किलें कड़ी कर रहे है.
Delhi में पिछले दस सालों से आम आदमी पार्टी की सरकार है, सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है इस बार आम आदमी पार्टी के हालात इस बार सही नहीं है, तमाम बड़े बड़े वादे जो चुनावों के पहले किये गए थे उनमे से कई वादे तो धरातल पर उतरे ही नहीं, तमाम इलाको में जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
आम आदमी पार्टी का सबसे बड़ा वादा दिल्ली वासियों को साफ़ पानी देने का था, दिल्ली के कई इलाकों में आज भी जनता टैंकर के पानी पर आश्रित है, गंदे पानी की सप्लाई की शिकायते तो आम है, नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ नागरिक कहते है आप बताओ दिल्ली में कांग्रेस की शीला जी की सरकार के बाद पिछले दस सालों में कितने नए स्कूलों का निर्माण हुआ?
आगे वो कहते है Delhi में सिर्फ सिर्फ दिखावटी काम हो रहा है, बड़े बड़े वादे तो हो रहे है लेकिन कार्य नहीं हो रहा, स्कूलों की बिल्डिंग का केवल नवीनीकरण करने से क्या शिक्षा व्यवस्था बेहतर हो जाएगी?
दूसरी तरफ कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में जो फायदा मिला है उससे उत्साहित होकर इस बार चुनावी मैदान में कांग्रेस पूरे दम ख़म से लड़ रही है , कांग्रेस को इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, दूसरी तरफ फिर से भाजपा मोदी जी के चेहरे एवं केजरीवाल की नाकामियों पर प्रहार करते हुए चुनावी ताल ठोक रही है, सत्ता की कुंजी जनता के हाथो में है देखते है Delhi में किसकी किस्मत का ताला खुलता है?





























































