दाल
Netaji is in trouble by giving the statement of Rs 100 per kg pulses?

आपको बताते चले उत्तर प्रदेश में अभी कुछ दिनों पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को नेताजी सम्बोधित कर रहे थे, तभी एक पत्रकार ने सुरसा के मुँह की तरह बढ़ती महंगाई को लेकर सवाल पूछने की जुर्रत कर डाली, मंत्री जी पहले तो सकपकाए, लेकिन फिर बड़ी चालाकी से मुस्कुराते हुए बोले “सौ रूपये किलो”  से ज्यादा महँगी दाल कही भी नहीं मिल रही.

इस बयान के आने के बाद से ही कोहराम मचा हुआ है, तमाम प्रमुख विपक्षी दल मंत्री जी की दाल नहीं गलने दे रहें है, तमाम पत्रकार कैमरा माइक लेकर मैदान में कूद पड़े है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने भी मंत्री जी को लताड़ लगाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा “आटे-दाल का भाव तो आम लोगों को पता होगा, मंत्री-अधिकारी तो अयोध्या में जमीनों का भाव पता करने में व्यस्त थे.

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मंत्री जी गरीबी और महंगाई का मजाक उड़ा रहे

बताते चले अयोध्या में बड़े बड़े अधिकारियों, पूंजीपतियों, नेताओ , नेताओ के रिश्तेदारों ने स्थानीय लोगो से उनकी जमीनें खरीद डाली है, और अब जब जमीनों के भाव आसमान छू रहें है तो ऐसा सुनंने में आ रहा है कुछ लोगो अब उन्ही जमीनों को ऊँचे भाव पर बेच भी रहें है, तो आख़िरकार मुनाफा बड़े बड़े लोग कमा रहें, स्थानीय जन समुदाय अपने आपको ठगा हुआ महसूस का रहा होगा?

एक एक्स पलटफोर्म यूजर लिखते है आलू, प्याज, टमाटर, भिंडी, हरी मिर्च, गोभी, अदरक, शिमला मिर्च, तुरई, बैंगन, लौकी, धनिया, लहसुन इत्यादि के भाव आसमान छू रहे है. सब्जियों और खाद्य पदार्थों जैसे दाल,चावल, नमक,तेल,घी इत्यादि की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने आम आदमी की रसोई का पूरा बजट ही बिगाड़ दिया है.  गरीब आदमी का जीना मुहाल हो गया है.  लोगों की थाली से हरी सब्जी गायब हो गई है.

वो आगे लिखते है पटना में आलू ही 45-50 ₹ किलो बिक रहा है. सरकार के कर्ता-धर्ता महंगाई पर बोलने के लिए तैयार ही नहीं है? जनता महंगाई की चक्की में पीस रही है फिर किस बात की डबल इंजन सरकार? सरकार प्रायोजित इस महंगाई से ना तो किसानों को फायदा होता है और ना ही आम आदमी को. सरकार द्वारा बिचौलियों को फायदा पहुँचाने के लिए खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि की गयी है.

मंत्री जी गरीबी और महंगाई का मजाक उड़ा रहे है कम से कम इतना संवेदनशील तो होना चाहिए कि आम आदमी इस हाड़तोड़ महंगाई में किस प्रकार गुजर बसर कर रहा है, जिस घर में केवल एक या दो सदस्य कमा रहें हो वहां तो घर चलना बहुत ज्यादा मुश्किल हो चला है, बाजार में भी भी रोजगार नहीं है, छोटे और मध्यम काम धंधे धप पड़े है, पढाई पर लाखो रूपये फूंकने के बावजूद युवाओ को रोजगार नहीं मिल रहा है, मंत्री जी ऊपर से घाव पर नामक मिर्च रगड़ रहें है, जनता जागरूक होकर सरकार से सवाल पूछना शुरू करे.

 

 

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