Millions of families will get big help as soon as this demand of the opposition is accepted, but?
Millions of families will get big help as soon as this demand of the opposition is accepted, but? Note: This is symbolic image only. yUVAKNAD.COM

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके कहां है करुणा की वजह से जिनकी मृत्यु हो गई है उनके परिवारों को केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ₹400000 का मुआवजा नहीं दे पाएंगे क्योंकि यह रकम बहुत बड़ी है.

अब आप सोचिए और बताइए जिन्होंने अपने घर के मुख्य कमाने वालों को खो दिया है वह अब कैसे जीवित रह पाएंगे. उम्मीद तो यह की जानी चाहिए थी कि सरकार उन सभी परिवारों का संभल सहारा बने क्योंकि जनता है तभी सरकार है लेकिन सरकार के इस तरह के गैर जिम्मेदाराना जवाब से अब विपक्ष सरकार पर हमलावर है.

राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा है यह कैसी निर्दई सरकार है, जो महंगाई बढ़ाकर जनता का खून पी रही है. लेकिन मदद करने के नाम पर साफ साफ मुकर जाती है आखिर ₹400000 होते ही क्या है? किसी के जीवन के मूल्य का अंदाजा तो लगाया ही नहीं जा सकता, लेकिन सरकार से कुछ रहम दिल्ली की उम्मीद थी वह भी अब खत्म हुई प्रतीत हो रही है.

कांग्रेस की तरफ से तीखा हमला बोलते हुए कहा गया है सरकार इस तरह से अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकती. इस तरह की निष्ठुरता कतई सही नहीं है. बड़ी-बड़ी बातें करके सत्ता में आए लोगों को सोचना ही होगा अपनी जिम्मेदारी से भागने से समस्याएं हल नहीं होंगी. बल्कि धीरे-धीरे सभी की मदद करते रहने से अर्थव्यवस्था भी पटरी पर आना शुरू हो जाएगी. और जनता का सरकार पर भरोसा कैसे लगेगा यह जनतंत्र के लिए बहुत ही आवश्यक है.

2014 से पहले इस सरकार ने भी बड़े-बड़े दावे किए थे. तमाम तरह के कार्य सरकार अपने लिए कर रही है. अगर दिल्ली की बात करें सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट भी बहुत ही हाईलाइट हुआ है. करोड़ों रुपए इस प्रोजेक्ट में खर्च होंगे उसकी पूरी व्यवस्था है. लेकिन जिन परिवारों ने अपना सहारा खो दिया, उनको मदद करने के लिए सरकार इस तरह से कैसे इंकार कर सकती है.

सरकार को इस विषय में सोचना ही होगा. कोई योजना बनाकर इन करो ना कॉल में मारे गए लोगों के परिवार को सहायता करनी ही होगी. इसके अलावा अन्य कोई दूसरा उपाय नहीं है. क्योंकि कोई छोटा मोटा एनजीओ कोई संस्था या व्यक्ति लंबे समय तक इन परिवारों की देखभाल नहीं कर पाएगा. आगे चलकर भारत सरकार को उस परिवार में योग्य लोगों को रोजी रोजगार देने पर भी विचार करना होगा जिससे वह खुद कमा कर स्वावलंबी होते जाएं, और सरकार का आर्थिक बोझ धीरे धीरे कम होता चला जाए.

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