Sansad
The troubles of the NDA government increased on the second day of the Parliament session?

आपको बताते चले ईडी (ED) का खौफ इस वक्त पूरे देश में छाया हुआ है. तमाम विपक्षी नेताओं से भी ED पूछताछ कर रही है. कई नेताओं की गिरफ्तारी हो चुकी है. एनसीपी से लेकर शिवसेना के बड़े नेता ईडी की चपेट में है. राहुल गांधी तथा सोनिया गांधी से भी पूछताछ कर चुकी है, हालांकि इन दोनों की गिरफ्तारी नहीं हुई. संजय राउत गिरफ्तार हो चुके हैं. 4 तारीख तक उनको ED की कस्टडी में भेज दिया गया है.

विपक्षी पार्टियों के नेताओं के यहां ED के छापे हो रहे हैं, ED से पूछताछ कर रही है. अगर किसी ने कुछ गलत किया है तो बिल्कुल पूछताछ होनी चाहिए, गिरफ्तारी होनी चाहिए. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यह पूछताछ सिर्फ विपक्षी पार्टियों के नेताओं से ही क्यों हो रही है? बीजेपी के किसी नेता से ईडी ने पूछताछ की हो पिछले कुछ सालों में देखने को नहीं मिला. विपक्षी पार्टियां भी यह आरोप लगा रही हैं.

झारखंड को लेकर जो खबरें आ रही हैं वह भी विपक्ष के मन में चिंता पैदा कर रही हैं. झारखंड के तीन विधायक गिरफ्तार हुए हैं.  कैश के साथ बंगाल में और मंगल पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है. विपक्षी पार्टियां कई तरह के आरोप लगा रही हैं. झारखंड कांग्रेस के तीन विधायक पैसों के साथ पकड़े गए लेकिन अभी तक ED नहीं पहुँची. पहली बार कांग्रेस – जेएमएम चाहते है कि ED आए और जाँच करे, ताकि दोनों पार्टियों का आरोप सही साबित हो. लेकिन ED है कि आती ही नही.

आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? पिछले दिनों महाराष्ट्र की सरकार गिर गई. विपक्ष ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ईडी की रडार पर थे और इसी डर से उन्होंने शिवसेना से बगावत की और शिवसेना के विधायकों को तोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बना ली. विपक्ष आरोप लगा रहा है कि ED बीजेपी की मदद कर रही है और ED के सहारे बीजेपी राज्यों में विपक्षी पार्टियों की सरकार गिरा कर लोकतंत्र का खुलेआम मजाक उड़ा रही है.

अगर ED निष्पक्ष है तो बिना पार्टी देखें पूछताछ और गिरफ्तारियां क्यों नहीं हो रही है? क्या ED की नजर में बीजेपी के नेताओं ने कोई गलती नहीं की है? राहुल गांधी गुजरात के मुंद्रा पोर्ट को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं. पिछले कुछ सालों में वहां लगातार ड्रग्स पकड़ी गई है, लेकिन ED मुंद्रा पोर्ट के मालिक से कोई पूछताछ नहीं कर रही है, कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. तो क्या यह नहीं माना जाना चाहिए कि सत्ता पक्ष के इशारे पर विपक्षी नेताओं से एकतरफा पूछताछ हो रही है और गिरफ्तारियां हो रही है?

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