After Indore, contaminated water wreaks havoc in Amit Shah's stronghold

इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के गृह क्षेत्र में भी वही भयावह तस्वीर सामने आ गई है.  दूषित पेयजल की वजह से सैकड़ों बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं और उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा है. इस घटना ने एक बार फिर सरकारी दावों, जल आपूर्ति व्यवस्था और जनस्वास्थ्य तंत्र की पोल खोलकर रख दी है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले कुछ दिनों से गृह मंत्री Amit Shah के गढ़ में  में बच्चों को अचानक उल्टी, दस्त, तेज बुखार और पेट दर्द की शिकायत होने लगी.  शुरुआत में इसे मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन जब एक के बाद एक सैकड़ों बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी तो हड़कंप मच गया.  सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई कि कई जगह अतिरिक्त बेड लगाने पड़े.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई किया जा रहा था.  कई बार नगर निगम और जल विभाग से शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला.  न तो पाइपलाइन की जांच हुई और न ही पानी की गुणवत्ता पर कोई ठोस कार्रवाई की गई.  नतीजा यह हुआ कि वही दूषित पानी बच्चों के शरीर में जहर बनकर उतर गया.

स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में भी पानी के दूषित होने की आशंका जताई गई है.  कुछ स्थानों से लिए गए सैंपल में बैक्टीरिया की मौजूदगी की बात सामने आई है. विशेषज्ञों का कहना है कि सीवरेज और पीने के पानी की लाइनों के आपस में मिल जाने से यह स्थिति पैदा हुई हो सकती है.  अगर समय रहते रखरखाव और नियमित जांच होती, तो इस संकट को टाला जा सकता था.

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है.  इंदौर की घटना के बाद भी अगर सरकार और प्रशासन ने सबक नहीं लिया, तो यह सीधी लापरवाही का प्रमाण है.  जिस क्षेत्र को सत्ता का गढ़ कहा जाता है, वहां ऐसी बदहाल व्यवस्था होना इस बात का संकेत है कि आम जनता की सेहत प्राथमिकता नहीं, बल्कि सिर्फ कागजी योजनाओं और आंकड़ों में सिमट कर रह गई है.

अस्पतालों में भर्ती बच्चों के माता-पिता का दर्द साफ देखा जा सकता है.   कई परिवार ऐसे हैं जो रोज़ कमाकर खाने वाले हैं.  उनके लिए इलाज का खर्च उठाना आसान नहीं है.  सरकार की ओर से मुफ्त इलाज और दवाइयों की घोषणा जरूर की गई है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में अव्यवस्था और संसाधनों की कमी साफ झलक रही है.

विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है.  उनका कहना है कि “डबल इंजन सरकार” के तमाम दावों के बावजूद बुनियादी सुविधाएं तक सुरक्षित नहीं हैं.  पीने का साफ पानी हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन उसे भी सुनिश्चित करने में सरकार विफल साबित हो रही है.

फिलहाल प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है.  प्रभावित इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई किया जा रहा है और पाइपलाइन की मरम्मत का आश्वासन दिया गया है.  लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कदम स्थायी समाधान होंगे या फिर कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा?

इंदौर के बाद Amit Shahके गढ़ में दूषित पानी से फैली यह त्रासदी सिर्फ एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है. जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी और बुनियादी सेवाओं को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं बार-बार मासूमों की जान और सेहत से खिलवाड़ करती रहेंगी.

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