विदित हो बर्मिघम में इस समय कॉमन वेल्थ गेम 2022 (CWG 2022) चल रहे है, यहाँ अपने देश भारत का डंका फिर से भारत की लाड़ली बेटी ने बजा दिया है.
क्या वजह थी डिप्रेशन में जाने की:-
आपको बताते चलें मणिपुर की मीराबाई चानू के खेल कैरियर में एक बार ऐसा अवसर आया था जब वह डिप्रेशन में चली गई थी लेकिन लड़ने के उनके जज्बे ने खेल में उनकी शानदार वापसी कराई, और उन्होंने इस कठिन परिस्थिति से निकलने के बाद कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और भारत देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिया.
यह वाकया 2016 के रियो ओलंपिक का है उस वक्त मीराबाई चानू को निराशाजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ गया था. किसी कारण बस वह अपना मैच पूरा नहीं कर पाई थी, जिसके कारण उनके नाम के आगे डिड नॉट फिनिश लिख दिया गया था. इसी वजह से उनको काफी आलोचना का शिकार होना पड़ा और मनोवैज्ञानिक दबाव की वजह से वह डिप्रेशन में चली गई थी, बाद में उन्हें अपना इलाज भी इसी वजह से कराना पड़ा था.
सारी विफलताओं को भूल कर सब कुछ पीछे छोड़ कर निराशा से आशा की तरफ आगे बढ़कर मीराबाई चानू ने देश के सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायक बन कर दिखा दिया है. अगर इरादे मजबूत हो और देश के लिए कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो आप कुछ भी कर सकते हैं.
मीराबाई चानू ने 2018 में ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रमंडल खेलों में 48 किलो वर्ग के भारोत्तोलन में गोल्ड अपने नाम किया था इसके बाद उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर जीतकर वेटलिफ्टिंग में भारत को 21 साल बाद मेडल दिलाया था अब फिर से उन्होंने तीसरी बार देश का नाम रोशन किया है उन्होंने बर्मिंघम में (CWG 2022) में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है.





























































