When the value of rupee falls against the dollar
When the value of rupee falls against the dollar

आपको बताते चलें पिछले कुछ महीनों से Dollar के मुकाबले रूपये की कीमत घटती जा रही है, भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत सही नहीं चल रही है.  रुपए का लगातार अवमूल्यन होता जा रहा है जिसकी वजह से व्यापार घाटा भी बढ़ रहा है और विदेशों से आयातित वस्तुएं और महंगी हो चली है.

रुपए के डॉलर (Dollar ) के मुकाबले कीमत गिरने से विदेशों में पढ़ाई कर रहे छात्रों एवं वहां कार्यरत लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है,  सबसे बड़ी मार उन छात्रों पर पड़ती है जो एक निश्चित समय अवधि के लिए विदेशों में रह रहे हैं, सबसे बड़ी बात है उन्होंने सीमित समय का लोन लिया हुआ है.  जिससे उनको अपनी पढ़ाई पूरी करते ही ब्याज सहित चुकाना होगा. क्योंकि कृपया की कीमत इस वक्त Dollar  के मुकाबले  ₹80 के आस पास आ गई है. तो विदेशों में उनके खर्चे और ज्यादा बढ़ जाएंगे.  और इसका भार उन्हीं विद्यार्थियों के कंधों पर होगा जिन्होंने अभी तक एक भी रुपया कमाना शुरू नहीं किया है.

दूसरा प्रभाव यह होगा कि विदेशों से आयातित सभी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी.  खासकर उन जगहों से जहां हमें डॉलर (Dollar)  के रूप में भुगतान करना होता है.  इसका नुकसान यह होगा कि देश के आम आदमी पर सबसे ज्यादा इसका बोझ पड़ेगा.

डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत गिरने से दवाइयां पेट्रोल डीजल और  महंगा होगा , इससे धुलाई भाड़ा बढ़ जायेगा, और तमाम रोजाना जरुरत की वस्तुए महँगी हो जाएँगी.

केंद्र सरकार तमाम प्रयास कर रही है किसी भी तरह से डॉलर के मुकाबले रुपए को कीमत गिरने से रोका जाए,  लेकिन अभी फिलहाल कोई स्थाई उपाय नहीं निकल पा रहा है.  जिसकी वजह से रुपया लगातार गिरता ही चला जा रहा है.  बैंकों में ब्याज दरें बढ़ गई हैं. सबसे बड़ी मार होम लोन(Home Loan) और अन्य तरह के लोन लिए हुए नागरिकों पर पड़ेगी.

आपको बताते चलें भारत सरकार ने जीएसटी के घरों में भी बदलाव किया है अब डिब्बा बंद मक्खन दूध दही पर भारत सरकार ने 5% जीएसटी लगा दी है जिसकी वजह से यह वस्तुएं भी और महंगी हो जाएँगी और इसका सीधा प्रभाव देश के आम नागरिकों पर पड़ेगा.

भारत सरकार को सबसे पहले अपने नागरिकों की आय के स्रोत (Source Of Income)  बढ़ाने पर विचार करना चाहिए.  लेकिन सरकार अपनी आय के स्रोत बढ़ाने पर ज्यादा चिंतित दिखाई दे रही है.  इस तरह से अर्थव्यवस्था कैसी चलेगी?  जब नागरिकों की जेब में पूंजी (Capital) ही नहीं होगी तो किस प्रकार से बाजार(Market)  चल पाएंगे?

भारत सरकार (Indian Goverment) को अति शीघ्र मध्यम एवं लघु उद्योगों (Industries) को, छोटे और मझोले उद्योगों को सहायता देनी होगी.  जिससे वह निर्बाध रूप से अपने रुके हुए उद्यमों को शुरू करके अधिक से अधिक रोजगार उत्पन्न करें.  और देश में देश के लोगों को रोजगार (Employment)  मिले.  उनकी आजीविका बढे और अर्थव्यवस्था (Economy) फिर से पटरी पर लौट आए उम्मीद यही है. उम्मीद है सरकार के प्रयासों से अब डॉलर (Dollar) के मुकाबले रूपये का अवमूल्यन रुकेगा, और बाजार में थोड़ी स्थिरता आएगी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here